एकता नगर में शिव पुराण कथा का चौथा दिन में प्रवेश,
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- kakkar.news
- October 29, 2025
- Punjab
एकता नगर में शिव पुराण कथा का चौथा दिन में प्रवेश,
फिरोजपुर 29 अक्टूबर 2025 (सिटीजनज़ वॉइस)
भक्ति श्रद्धा एव में भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का विस्तृत वर्णन है, सतगुरु दीन दियालु महाराज जी के परम् शिष्य श्री विनायक शास्त्री महाराज वृंदावन वाले शिव अमृतवर्षा कथा जिसे ‘रुद्र संहिता’ के ‘पार्वती खंड’ में विस्तार से बताया गया है। यह कथा शिव-शक्ति के मिलन का प्रतीक है, जो सृष्टि के कल्याण के लिए अत्यंत आवश्यक था। कथा में शिव भक्तो सती का पुनर्जन्म जब प्रजापति दक्ष के यज्ञ में देवी सती ने स्वयं को अग्नि को समर्पित कर दिया, तब भगवान शिव गहरे शोक में चले गए और तपस्या में लीन हो गए। सती ने हिमालय की पुत्री पार्वती के रूप में पुनर्जन्म लिया और बचपन से ही भगवान शिव को पति के रूप में पाने का निश्चय कर लिया। पार्वती की कठोर तपस्या
पार्वती ने शिव को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या इतनी प्रबल थी कि तीनों लोकों में हाहाकार मच गया। शिव ने उनकी परीक्षा लेने के लिए कई प्रयास किए, लेकिन पार्वती अपने निश्चय पर अडिग रहीं। कामदेव का बलिदान इसी बीच, तारकासुर नामक राक्षस का आतंक बढ़ गया था, और उसे मारने के लिए केवल शिव और पार्वती का पुत्र ही सक्षम था। देवताओं के आग्रह पर कामदेव ने शिव की तपस्या भंग करने का प्रयास किया। शिव ने क्रोध में आकर कामदेव को भस्म कर दिया। शिवजी का विवाह के लिए राजी होना पार्वती की अटूट भक्ति और तपस्या से प्रसन्न होकर शिवजी ने अंततः उनसे विवाह करने के लिए अपनी सहमति दी। पार्वती के पिता हिमालय भी इस विवाह के लिए राजी हो गए। शिवजी की बारात शिवजी का विवाह अन्य विवाहों से भिन्न था। उनकी बारात में देवता, भूत-प्रेत, गण और तमाम तरह के अद्भुत जीव शामिल थे, जिससे एक अनोखा और विलक्षण वातावरण बन गया था। बारात का यह रूप देखकर पार्वती की माता मैना चिंतित हो गईं, लेकिन बाद में शिव के वास्तविक स्वरूप को देखकर प्रसन्न हुईं। विवाह संपन्न मार्गशीर्ष महीने में शुभ मुहूर्त पर, पार्वती के पिता हिमालय ने वेद-मंत्रों के उच्चारण के बीच विधि-विधान से पार्वती का कन्यादान किया। इस प्रकार शिव और शक्ति का विवाह संपन्न हुआ। देवताओं ने जय-जयकार की और आकाश से पुष्प वर्षा हुई। यह विवाह केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं था, बल्कि शिव और शक्ति के मिलन से सृष्टि के कल्याण का मार्ग प्रशस्त हुआ। यह पावन कथा 31 अक्टूबर तक चलेगी, जिसमें प्रतिदिन शास्त्री महाराज शिव महम के नये पाठ से भक्तों को आध्यात्म के दर्शन करायेंगे।
